Transliteration: (Wa'bud Rabbaka hattaa yaatiyakal yaqeen (section 6))
और अपने रब की इबादत करते रहिए यहाँ तक कि आपको यक़ीन (मौत) आ पहुँचे [109]।
मुफ़स्सिरीन के नज़दीक यहाँ 'यक़ीन' से मुराद मौत है, क्योंकि मौत का आना यक़ीनी और अटल है। चुनाँचे इसका मतलब है: आख़िरी साँस तक अल्लाह की इबादत जारी रखिए। जब हुज़ूर अकरम ﷺ जैसी मुक़द्दस हस्ती को आख़िरी दम तक इबादत का हुक्म है, तो कोई भी इन्सान विलायत के किसी भी मक़ाम पर पहुँचकर नमाज़ व इबादत से बरी नहीं हो सकता।
मौत के साथ शरीअत के फ़राइज़ का वक़्त पूरा हो जाता है; अलबत्ता अल्लाह के मक़बूल बन्दों की क़ब्रें भी ज़िक्र व इबादत का नूरानी गहवारा बन जाती हैं — जैसा कि सहाबा-ए-किराम ने बाज़ मक़बूल बन्दों की क़ब्रों से सूरह अल-मुल्क की तिलावत की आवाज़ सुनी थी।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat