कुरान - 15:99 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

99
وَٱعۡبُدۡ رَبَّكَ حَتَّىٰ يَأۡتِيَكَ ٱلۡيَقِينُ

Transliteration: (Wa'bud Rabbaka hattaa yaatiyakal yaqeen (section 6))

और अपने रब की इबादत करते रहिए यहाँ तक कि आपको यक़ीन (मौत) आ पहुँचे [109]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 99 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 99 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

और अपने रब की इबादत करते रहिए यहाँ तक कि आपको यक़ीन (मौत) आ पहुँचे [109]।

[109] आख़िरी साँस तक इबादत की फ़र्ज़ियत

मुफ़स्सिरीन के नज़दीक यहाँ 'यक़ीन' से मुराद मौत है, क्योंकि मौत का आना यक़ीनी और अटल है। चुनाँचे इसका मतलब है: आख़िरी साँस तक अल्लाह की इबादत जारी रखिए। जब हुज़ूर अकरम ﷺ जैसी मुक़द्दस हस्ती को आख़िरी दम तक इबादत का हुक्म है, तो कोई भी इन्सान विलायत के किसी भी मक़ाम पर पहुँचकर नमाज़ व इबादत से बरी नहीं हो सकता।

[110] मौत के बाद की रूहानी ज़िन्दगी

मौत के साथ शरीअत के फ़राइज़ का वक़्त पूरा हो जाता है; अलबत्ता अल्लाह के मक़बूल बन्दों की क़ब्रें भी ज़िक्र व इबादत का नूरानी गहवारा बन जाती हैं — जैसा कि सहाबा-ए-किराम ने बाज़ मक़बूल बन्दों की क़ब्रों से सूरह अल-मुल्क की तिलावत की आवाज़ सुनी थी।

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