कुरान - 15:94 सूरह अल-हिज्र अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

94
فَٱصۡدَعۡ بِمَا تُؤۡمَرُ وَأَعۡرِضۡ عَنِ ٱلۡمُشۡرِكِينَ

Transliteration: (Fasda' bimaa tu'maru wa a'rid anil mushrikeen)

तो खुल्लम-खुल्ला सुना दीजिए जो आपको हुक्म दिया गया है [105] और मुश्रिकों से मुँह फेर लीजिए। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-हिज्र आयत 94 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-हिज्र – आयत 94 की तफ़सीर (तफ़सीरे नईमी)

तो खुल्लम-खुल्ला सुना दीजिए जो आपको हुक्म दिया गया है [105] और मुश्रिकों से मुँह फेर लीजिए।

[105] ऐलानिया दावत-ए-हक़ और बे-ख़ौफ़ तब्लीग़

इससे दो अहम सबक़ मिलते हैं:

  1. दीन में कोई बात छिपाई नहीं गई: हुज़ूर अकरम ﷺ ने अल्लाह का हर हुक्म पूरी तरह उम्मत तक पहुँचाया। जो यह गुमान करे कि नबी ने कोई हुक्म छुपा लिया, वह झूठा और गुमराह है।

  2. ईमान का खुला इज़हार: मोमिन को अपना ईमान छुपाने या रियाकारी करने की ज़रूरत नहीं; उसका ज़ाहिर व बातिन हक़ के मुताबिक़ होना चाहिए। मुश्रिकों की मुख़ालिफ़त की परवाह किए बिना बे-ख़ौफ़ होकर दावत-ए-हक़ पेश करना लाज़मी है।

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