Transliteration: (Fasda' bimaa tu'maru wa a'rid anil mushrikeen)
तो खुल्लम-खुल्ला सुना दीजिए जो आपको हुक्म दिया गया है [105] और मुश्रिकों से मुँह फेर लीजिए।
इससे दो अहम सबक़ मिलते हैं:
दीन में कोई बात छिपाई नहीं गई: हुज़ूर अकरम ﷺ ने अल्लाह का हर हुक्म पूरी तरह उम्मत तक पहुँचाया। जो यह गुमान करे कि नबी ने कोई हुक्म छुपा लिया, वह झूठा और गुमराह है।
ईमान का खुला इज़हार: मोमिन को अपना ईमान छुपाने या रियाकारी करने की ज़रूरत नहीं; उसका ज़ाहिर व बातिन हक़ के मुताबिक़ होना चाहिए। मुश्रिकों की मुख़ालिफ़त की परवाह किए बिना बे-ख़ौफ़ होकर दावत-ए-हक़ पेश करना लाज़मी है।
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