कुरान - 18:90 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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حَتَّىٰٓ إِذَا بَلَغَ مَطۡلِعَ ٱلشَّمۡسِ وَجَدَهَا تَطۡلُعُ عَلَىٰ قَوۡمٖ لَّمۡ نَجۡعَل لَّهُم مِّن دُونِهَا سِتۡرٗا

Transliteration: (Hattaaa izaa balagha matli'ash shamsi wajdahaa tatlu'u alaa qawmil lam naj'al lahum min doonihaa sitraa)

यहाँ तक कि जब वे सूरज निकलने की जगह पहुंचे, तो उन्होंने उसे ऐसी क़ौम पर तुलूअ होता पाया जिसके लिए हमने सूरज के मुक़ाबले में कोई ओट (पर्दा या साया) नहीं रखा था। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 90 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 90

✅ मशरिक़ की वहशी क़ौम और धूप से बेपर्दगी

वे दुनिया के पूर्वी छोर पर एक ऐसी क़ौम के पास पहुंचे जो निहायत पसमांदा और सादा ज़िन्दगी गुज़ारती थी। उनके पास मकान, दरख़्त या कपड़े जैसी कोई ओट न थी जो उन्हें सूरज की तपिश से बचा सके। वे या तो गारों में छिपते थे या पानी में उतर जाते थे।

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