Transliteration: (Qul innamaaa ana basharun mislukum yoohaaa ilaiya annamaa ilaahukum Ilaahunw Waahid; faman kaana yarjoo liqaaa'a Rabbihee falya'mal 'amalan saalihanw wa laa yushrik bi'ibaadati Rabbiheee ahadaa (section 12))
यह सूरह कहफ़ की आख़िरी और निहायत मुबारका आयत है। नबी करीम (ﷺ) ने अपनी बशरीयत और नबुव्वत का इज़हार फ़रमाया कि मैं तुम्हारी तरह इंसान हूँ मगर अल्लाह ने मुझे वह्य और रिसालत से नवाज़ा है। निजात का अज़ीम नुस्खा यह है कि बंदा दो शर्तों को पूरा करे: (1) हर अमल अल्लाह की रज़ा के लिए ख़ालिस हो और उसमें रत्ती बराबर भी शिर्क या रियाकारी न हो, और (2) अमल शरीअत व सुन्नत के मुताबिक़ नेक (सालेह) हो। यही अल्लाह से मुलाक़ात और निजात का एकमात्र रास्ता है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat