कुरान - 18:110 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

110
قُلۡ إِنَّمَآ أَنَا۠ بَشَرٞ مِّثۡلُكُمۡ يُوحَىٰٓ إِلَيَّ أَنَّمَآ إِلَٰهُكُمۡ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞۖ فَمَن كَانَ يَرۡجُواْ لِقَآءَ رَبِّهِۦ فَلۡيَعۡمَلۡ عَمَلٗا صَٰلِحٗا وَلَا يُشۡرِكۡ بِعِبَادَةِ رَبِّهِۦٓ أَحَدَۢا

Transliteration: (Qul innamaaa ana basharun mislukum yoohaaa ilaiya annamaa ilaahukum Ilaahunw Waahid; faman kaana yarjoo liqaaa'a Rabbihee falya'mal 'amalan saalihanw wa laa yushrik bi'ibaadati Rabbiheee ahadaa (section 12))

कह दीजिए कि 'मैं तो बस तुम्हारी ही तरह एक इंसान हूँ, मेरी तरफ़ यह वह्य की जाती है कि तुम्हारा माबूद बस एक ही माबूद (अल्लाह) है; पस जो शख़्स अपने रब से मिलने की उम्मीद रखता हो, तो उसे चाहिए कि वह नेक अमल करे और अपने रब की इबादत में किसी को भी शरीक न ठहराए।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 110 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 110

✅ सूरह अल-कहफ़ का अज़ीम ख़ात्मा: तौहीद, इख़्लास और सुन्नत

यह सूरह कहफ़ की आख़िरी और निहायत मुबारका आयत है। नबी करीम (ﷺ) ने अपनी बशरीयत और नबुव्वत का इज़हार फ़रमाया कि मैं तुम्हारी तरह इंसान हूँ मगर अल्लाह ने मुझे वह्य और रिसालत से नवाज़ा है। निजात का अज़ीम नुस्खा यह है कि बंदा दो शर्तों को पूरा करे: (1) हर अमल अल्लाह की रज़ा के लिए ख़ालिस हो और उसमें रत्ती बराबर भी शिर्क या रियाकारी न हो, और (2) अमल शरीअत व सुन्नत के मुताबिक़ नेक (सालेह) हो। यही अल्लाह से मुलाक़ात और निजात का एकमात्र रास्ता है।

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