कुरान - 18:105 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

105
أُوْلَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِـَٔايَٰتِ رَبِّهِمۡ وَلِقَآئِهِۦ فَحَبِطَتۡ أَعۡمَٰلُهُمۡ فَلَا نُقِيمُ لَهُمۡ يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِ وَزۡنٗا

Transliteration: (Ulaaa'ikal lazeena kafaroo bi aayaati Rabbihim wa liqaaa'ihee fahabitat a'maaluhum falaa nuqeemu lahum Yawmal Qiyaamati waznaa)

ये वे लोग हैं जिन्होंने अपने रब की आयतों और उसके सामने हाज़िरी का इनकार किया, तो उनके तमाम आमाल ज़ाया हो गए; पस हम क़ियामत के दिन उनके लिए कोई वज़न (क़द्र व क़ीमत) क़ायम नहीं करेंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 105 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 105

✅ कुफ़्र के सबब आमाल का हब्त (ज़ाया) होना

चूँकि उन्होंने अल्लाह की निशानियों और आख़िरत की पेशी का इनकार किया, इसलिए उनकी कोई भी दुनियावी नेकी आख़िरत में काम नहीं आएगी। मीज़ान में उनका कोई वज़न नहीं होगा और अल्लाह की नज़र में उनकी हैसियत मच्छर के पर के बराबर भी नहीं होगी।

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