कुरान - 18:1 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِيٓ أَنزَلَ عَلَىٰ عَبۡدِهِ ٱلۡكِتَٰبَ وَلَمۡ يَجۡعَل لَّهُۥ عِوَجَاۜ

Transliteration: (Alhamdu lillaahil lazeee anzala 'alaa 'abdihil kitaaba wa lam yaj'al lahoo 'iwajaa)

तमाम तारीफ़ें अल्लाह ही के लिए हैं जिसने अपने बन्दे (मुहम्मद ﷺ) पर यह किताब (क़ुरआन) नाज़िल फ़रमाई और इसमें कोई टेढ़ (कमी या कजी) नहीं रखी। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 1

✅ क़ुरआन मजीद की हम्द और सीधी राह

सूरह अल-कहफ़ का आग़ाज़ अल्लाह तआला की हम्द व सना से होता है। अल्लाह ने अपने मुक़द्दस रसूल हज़रत मुहम्मद (ﷺ) पर यह अज़ीम किताब क़ुरआन मजीद नाज़िल फ़रमाई, जो हर ऐब, विरोधाभास और टेढ़ेपन से पाक है। यह किताब मुकम्मल तौर पर खरी, सीधी और सच्चाई पर मबनी है जो इंसानियत को सीधी राह दिखाती है।

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