कुरान - 18:6 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
فَلَعَلَّكَ بَٰخِعٞ نَّفۡسَكَ عَلَىٰٓ ءَاثَٰرِهِمۡ إِن لَّمۡ يُؤۡمِنُواْ بِهَٰذَا ٱلۡحَدِيثِ أَسَفًا

Transliteration: (Fala'allaka baakhi'un nafsaka 'alaaa aasaarihim illam yu'minoo bihaazal hadeesi asafaa)

तो (ऐ नबी!) शायद आप उनके पीछे ग़म के मारे अपनी जान हलाक कर डालेंगे अगर वे इस बात (क़ुरआन) पर ईमान न लाएं! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 6

✅ उम्मत की हिदायत के लिए रसूले अकरम (ﷺ) का शदीद दर्द

नबी करीम (ﷺ) अपनी क़ौम के ईमान न लाने और जहन्नम के रास्ते पर जाने से इस क़दर रंजीदा और ग़मगीन रहते थे कि आपकी जान पर बन आती थी। अल्लाह तआला ने अपने नबी को तसल्ली दी कि आपका फ़र्ज़ केवल पैग़ाम पहुंचा देना है, किसी को ज़बरदस्ती मोमिन बनाना आपकी ज़िम्मेदारी नहीं है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now