Transliteration: (Fala'allaka baakhi'un nafsaka 'alaaa aasaarihim illam yu'minoo bihaazal hadeesi asafaa)
नबी करीम (ﷺ) अपनी क़ौम के ईमान न लाने और जहन्नम के रास्ते पर जाने से इस क़दर रंजीदा और ग़मगीन रहते थे कि आपकी जान पर बन आती थी। अल्लाह तआला ने अपने नबी को तसल्ली दी कि आपका फ़र्ज़ केवल पैग़ाम पहुंचा देना है, किसी को ज़बरदस्ती मोमिन बनाना आपकी ज़िम्मेदारी नहीं है।
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