कुरान - 18:7 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
إِنَّا جَعَلۡنَا مَا عَلَى ٱلۡأَرۡضِ زِينَةٗ لَّهَا لِنَبۡلُوَهُمۡ أَيُّهُمۡ أَحۡسَنُ عَمَلٗا

Transliteration: (Innaa ja'alnaa ma 'alal ardi zeenatal lahaa linabluwahum ayyuhum ahsanu 'amalaa)

बेशक हमने ज़मीन पर जो कुछ है उसे ज़मीन की ज़ीनत (शोभा) बनाया ताकि हम उनकी आज़माइश करें कि उनमें कौन अमल के एतबार से सबसे अच्छा है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 7

✅ दुनिया इम्तिहान गाह है: बेहतर अमल की आज़माइश

ज़मीन पर मौजूद तमाम रौनक़ें, बाग़ात, दौलत, हुस्न और वसाइल दरअसल इंसान के इम्तिहान के लिए हैं। अल्लाह यह देखना चाहता है कि कौन इन नेमतों को पाकर अल्लाह का शुक्रगुज़ार बनता है और नेक आमाल करता है, और कौन दुनिया की चमक-दमक में खोकर अल्लाह को भूल जाता है।

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