कुरान - 18:9 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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أَمۡ حَسِبۡتَ أَنَّ أَصۡحَٰبَ ٱلۡكَهۡفِ وَٱلرَّقِيمِ كَانُواْ مِنۡ ءَايَٰتِنَا عَجَبًا

Transliteration: (Am hasibta anna Ashaabal Kahfi war Raqeemi kaanoo min Aayaatinaa 'ajabaa)

क्या तुम्हारा ख़्याल है कि ग़ार (कहफ़) और कतबे (रक़ीम) वाले हमारी निशानियों में से कोई बहुत अनोखी निशानी थे? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 9 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 9

✅ अस्हाबे कहफ़ का वाक़िआ: अल्लाह की बेपायां क़ुदरत

यहाँ से 'अस्हाबे कहफ़' (गुफ़ा वाले नौजवानों) का मशहूर वाक़िआ शुरू होता है। अल्लाह फ़रमाता है कि क्या तुम समझते हो कि उनका कई सौ साल तक ग़ार में ज़िन्दा सोना कोई अनोखा अजूबा है? अल्लाह की क़ुदरत में ज़मीन व आसमान और पूरी कायनात की ख़िलक़त इससे कहीं ज़्यादा अज़ीम और हैरतअंगेज़ निशानियाँ हैं।

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