कुरान - 18:10 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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إِذۡ أَوَى ٱلۡفِتۡيَةُ إِلَى ٱلۡكَهۡفِ فَقَالُواْ رَبَّنَآ ءَاتِنَا مِن لَّدُنكَ رَحۡمَةٗ وَهَيِّئۡ لَنَا مِنۡ أَمۡرِنَا رَشَدٗا

Transliteration: (Iz awal fityatu ilal Kahfi faqaaloo Rabbanaaa aatinaa mil ladunka rahmatanw wa haiyi' lanaa min amrinaa rashadaa)

जब उन चन्द नौजवानों ने ग़ार में पनाह ली, तो उन्होंने दुआ की, 'ऐ हमारे रब! हमें अपनी बारगाह से ख़ास रहमत अता फ़रमा, और हमारे इस मुआमले में हमारे लिए राह-ए-रास्त (कामयाबी) का सामान फ़राहम कर दे।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 10

✅ अस्हाबे कहफ़ की दुआ: रहमत और रुश्द की तलब

ये चन्द नेक नौजवान थे जो एक ज़ालिम और मुशरिक बादशाह (दक़यानूस) के ज़ुल्म से अपना ईमान बचाने के लिए बस्ती छोड़कर एक ग़ार में जा छिपे। उन्होंने सबसे पहले अल्लाह से दुआ मांगी कि ऐ रब, हमें अपनी रहमत की पनाह दे और हमारे इस मुआमले में हिदायत व आसानी का रास्ता निकाल दे। यह हर मोमिन के लिए मुश्किल वक़्त का बेहतरीन वज़ीफ़ा है।

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