कुरान - 18:12 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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ثُمَّ بَعَثۡنَٰهُمۡ لِنَعۡلَمَ أَيُّ ٱلۡحِزۡبَيۡنِ أَحۡصَىٰ لِمَا لَبِثُوٓاْ أَمَدٗا

Transliteration: (Summa ba'asnaahum lina'lama ayyul hizbaini ahsaa limaa labisooo amadaa (section 1))

फिर हमने उन्हें उठाया ताकि हम मालूम करें कि दोनों गिरोहों में से कौन उस मुद्दत को ज़्यादा सही याद रखने वाला है जो वे वहाँ ठहरे रहे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 12 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 12

✅ बेदारी और मुद्दत-ए-क़ियाम का मुज़ाहिरा

सैकड़ों बरस की तवील नींद के बाद अल्लाह ने उन्हें सही-सलामत जगाया ताकि दुनिया पर यह ज़ाहिर हो जाए कि मुर्दों को ज़िन्दा करना अल्लाह के लिए कितना आसान है, और यह कि उनकी मुद्दत के बारे में किसका अंदाज़ा सही था।

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