कुरान - 18:13 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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نَّحۡنُ نَقُصُّ عَلَيۡكَ نَبَأَهُم بِٱلۡحَقِّۚ إِنَّهُمۡ فِتۡيَةٌ ءَامَنُواْ بِرَبِّهِمۡ وَزِدۡنَٰهُمۡ هُدٗى

Transliteration: (Nahnu naqussu 'alaika naba ahum bilhaqq; innahum fityatun aamanoo bi Rabbihim wa zidnaahum hudaa)

हम आपको उनका सच्चा वाक़िआ बयान करते हैं; बेशक वे चन्द नौजवान थे जो अपने रब पर ईमान लाए थे, और हमने उन्हें हिदायत में और बढ़ा दिया था। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 13

✅ बा-ईमान नौजवानों की अज़मत और हिदायत में इज़ाफ़ा

क़ुरआन मजीद अस्हाबे कहफ़ का क़िस्सा मुकम्मल सच्चाई और हक़ीक़त के साथ बयान करता है। ये नौजवान थे जिन्होंने ऐश व इशरत और शिर्क के माहौल को ठुकराकर तौहीद को अपनाया। जब बंदा अल्लाह की राह में क़दम बढ़ाता है, तो अल्लाह उसकी हिदायत, सब्र और तक़वे को और ज़्यादा बढ़ा देता है।

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