कुरान - 18:15 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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هَـٰٓؤُلَآءِ قَوۡمُنَا ٱتَّخَذُواْ مِن دُونِهِۦٓ ءَالِهَةٗۖ لَّوۡلَا يَأۡتُونَ عَلَيۡهِم بِسُلۡطَٰنِۭ بَيِّنٖۖ فَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّنِ ٱفۡتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبٗا

Transliteration: (Haaa'ulaaa'i qawmunat takhazoo min dooniheee aalihatal law laa yaatoona 'alaihim bisultaanim baiyin; faman azlamu mimmaniftaraa 'alal laahi kazibaa)

'ये हमारी क़ौम के लोग हैं जिन्होंने अल्लाह के सिवा दूसरे माबूद बना लिए हैं; ये उन पर कोई खुली दलील क्यों नहीं लाते? फिर उस शख़्स से बड़ा ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह पर झूठ घड़े?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 15

✅ शिर्क की बेबुनियादी और खुली दलील का मुतालबा

अस्हाबे कहफ़ ने अक़्ल और दलील से अपनी क़ौम के शिर्क को बातिल साबित किया कि अगर ये झूठे माबूद वाक़ई इबादत के लायक़ हैं, तो इनके पास अपनी खुदाई की कोई सनद या मोजिज़ाना सबूत क्यों नहीं? बिना किसी दलील के अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहराना सबसे बड़ा ज़ुल्म है।

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