कुरान - 18:17 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
۞وَتَرَى ٱلشَّمۡسَ إِذَا طَلَعَت تَّزَٰوَرُ عَن كَهۡفِهِمۡ ذَاتَ ٱلۡيَمِينِ وَإِذَا غَرَبَت تَّقۡرِضُهُمۡ ذَاتَ ٱلشِّمَالِ وَهُمۡ فِي فَجۡوَةٖ مِّنۡهُۚ ذَٰلِكَ مِنۡ ءَايَٰتِ ٱللَّهِۗ مَن يَهۡدِ ٱللَّهُ فَهُوَ ٱلۡمُهۡتَدِۖ وَمَن يُضۡلِلۡ فَلَن تَجِدَ لَهُۥ وَلِيّٗا مُّرۡشِدٗا

Transliteration: (Wa tarash shamsa izaa tala'at tazaawaru 'an kahfihim zaatal yameeni wa izaa gharabat taqriduhum zaatash shimaali wa hum fee fajwatim minh; zaalika min Aayaatillaah; mai yahdil laahu fahuwal muhtad, wa mai yudlil falan tajida lahoo waliyyam murshidaa (section 2))

और आप देखते कि जब सूरज निकलता तो उनके ग़ार से दायें जानिब हट जाता, और जब डूबता तो उनसे बायें जानिब कतरा कर निकल जाता, और वे उस ग़ार के एक कुशादा हिस्से में थे; यह अल्लाह की निशानियों में से है। जिसे अल्लाह हिदायत दे वही सही राह पाने वाला है, और जिसे वह भटका दे तो आप उसके लिए कोई मददगार रहनुमा न पाएंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 17

✅ ग़ार की कु़दरती हिफ़ाज़त: धूप और हवा का मोअतदिल निज़ाम

अल्लाह तआला ने उस ग़ार का रुख़ ऐसा बनाया था कि सुबह व शाम सूरज की सीधी धूप उनके जिस्मों पर नहीं पड़ती थी जिससे उनके जिस्म ख़राब न हों, बल्कि हल्की ताज़ा हवा और रोशनी ग़ार के कुशादा हिस्से में पहुंचती रहती थी। यह सब अल्लाह की हिकमत और निशानियों में से एक अज़ीम निशानी थी।

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