कुरान - 18:5 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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مَّا لَهُم بِهِۦ مِنۡ عِلۡمٖ وَلَا لِأٓبَآئِهِمۡۚ كَبُرَتۡ كَلِمَةٗ تَخۡرُجُ مِنۡ أَفۡوَٰهِهِمۡۚ إِن يَقُولُونَ إِلَّا كَذِبٗا

Transliteration: (Maa lahum bihee min 'ilminw wa laa li aabaaa'ihim; kaburat kalimatan takhruju min afwaahihim; iny yaqooloona illaa kazibaa)

न तो उन्हें इस बात का कोई इल्म है और न उनके बाप-दादा को था। कितनी भारी बात है जो उनके मुंह से निकलती है; वे सिवाय झूठ के कुछ नहीं कहते! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 5

✅ शिर्क का खोखलापन और अज़ीम बोहतान

अल्लाह के लिए औलाद ठहराने वालों के पास न कोई अक़्ली दलील है और न कोई आसमानी सनद। यह केवल उनके मुंह से निकलने वाला एक भयानक और संगीन झूठ है। ख़ालिक़े कायनात को औलाद का मोहताज समझना अल्लाह की अज़मत पर बहुत बड़ा बोहतान है।

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