कुरान - 18:2 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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قَيِّمٗا لِّيُنذِرَ بَأۡسٗا شَدِيدٗا مِّن لَّدُنۡهُ وَيُبَشِّرَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ ٱلَّذِينَ يَعۡمَلُونَ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ أَنَّ لَهُمۡ أَجۡرًا حَسَنٗا

Transliteration: (Qaiyimal liyunzira ba'asan shadeedam mil ladunhu wa yubashshiral mu'mineenal lazeena ya'maloonas saalihaati anna lahum ajran hasanaa)

एकदम सीधी और दुरुस्त (किताब), ताकि वह अल्लाह की तरफ़ से एक सख़्त अज़ाब से डराए, और उन मोमिनों को जो नेक आमाल करते हैं इस बात की ख़ुशख़बरी दे कि उनके लिए बेहतरीन अज्र (बदला) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 2

✅ अज़ाब का डर और नेककारों के लिए जन्नत की बशारत

यह किताब 'क़य्यिम' (हक़ पर क़ायम और सीधी) है। इसका मक़सद यह है कि जो लोग अल्लाह की नाफ़रमानी और कुफ़्र करते हैं उन्हें अल्लाह के शदीद अज़ाब से आगाह किया जाए, और जो सच्चे दिल से ईमान लाए और नेक आमाल किए, उन्हें जन्नत और हमेशा रहने वाले इनाम की बशारत दी जाए।

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