कुरान - 18:109 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

109
قُل لَّوۡ كَانَ ٱلۡبَحۡرُ مِدَادٗا لِّكَلِمَٰتِ رَبِّي لَنَفِدَ ٱلۡبَحۡرُ قَبۡلَ أَن تَنفَدَ كَلِمَٰتُ رَبِّي وَلَوۡ جِئۡنَا بِمِثۡلِهِۦ مَدَدٗا

Transliteration: (Qul law kaanal bahru midaadal li kalimaati Rabbee lanafidal bahru qabla an tanfada Kalimaatu Rabbee wa law ji'naa bimislihee madadaa)

कह दीजिए कि 'अगर समन्दर मेरे रब के कलिमात (सिफ़ात, इल्म व हिकमत) को लिखने के लिए सियाही (रौशनाई) बन जाए, तो समन्दर ख़त्म हो जाएगा इससे पहले कि मेरे रब के कलिमात ख़त्म हों, चाहे हम उसकी मदद के लिए वैसा ही एक और समन्दर ले आएं!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 109 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 109

✅ अल्लाह के बेपायां इल्म और कलिमात की अज़मत

अल्लाह तआला का इल्म, हिकमत, कु़दरत और तारीफें ला-महदूद हैं। अगर दुनिया के सातों समन्दरों को रोशनाई बना दिया जाए और तमाम दरख़्तों को क़लम, तब भी समन्दर सूख जाएंगे लेकिन अल्लाह के कलिमात, राज़ और सिफ़ात कभी ख़त्म नहीं हो सकते।

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