Transliteration: (Yashhadu hul muqarra boon )
📖 "जिसे चुने हुए लोग देखेंगे।"
🔹 इस आयत में इल्लीयीन की अज़मत (महानता) को बयान किया गया है कि यह न सिर्फ़ एक बुलंद मक़ाम है, बल्कि इसे इज़्ज़तदार हस्तियाँ देखती और गवाही देती हैं।
🕌 "यश-हदु" (वह देखेगा) का अर्थ दो तरह से लिया जा सकता है:
🟢 शुहूद (हर वक़्त मौजूद रहना) – यानी फ़रिश्ते हमेशा इल्लीयीन में मौजूद रहते हैं।
🟢 मुशाहदा (देखना और गवाह बनना) – यानी क़यामत के दिन यह मक़ाम साफ़ तौर पर देखा जाएगा।
💠 फ़रिश्ते – वे यहाँ इज्ज़त और अदब के साथ हाज़िर रहते हैं, इसकी हिफ़ाज़त करते हैं और इबादत में मसरूफ़ होते हैं।
💠 क़यामत के दिन – फ़रिश्ते अल्लाह की अदालत (Divine Court) में ख़ास एहतराम के साथ खड़े होंगे।
💠 अल्लाह के चुने हुए नेक बंदे – वे इल्लीयीन में लिखे गए नामों को पहचानेंगे और हर मोमिन के दर्जे को जान लेंगे।
📜 वो फ़रिश्ते – जो हमेशा अल्लाह की इबादत में रहते हैं।
📜 वो नेक लोग – जिन्हें अल्लाह का क़रीब होने का शरफ़ मिला और जो जन्नत व जहन्नम के अहल (अधिवासी) को पहचानते हैं।
📜 कुछ रुहें – तफ़सीर अज़ीजी के मुताबिक़, कुछ पाक रुहें इल्लीयीन में, कुछ ज़मज़म में और कुछ आसमान और ज़मीन के दरमियान मौजूद रहती हैं।
🔹 यह आयत बताती है कि जिनका रिकॉर्ड इल्लीयीन में दर्ज है, वे बहुत बड़े मक़ाम के मालिक हैं, और उन्हें सबसे इज़्ज़तदार हस्तियाँ देखती और गवाही देती हैं।
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