Transliteration: (Wailul lil mutaffifeen)
"लानत है नाप-तौल में कमी करने वालों पर।"
यह सूरह मक्की हो सकती है या मदनी, या फिर यह मक्का से मदीना हिजरत के दौरान रास्ते में नाज़िल हुई हो सकती है।
अरबी व्यापारी अलग-अलग तराज़ू इस्तेमाल करते थे—खरीदते वक्त पूरा नापते और बेचते वक्त कम तौलते। यह बेईमानी आम थी, और यह आयत खासतौर पर अबू जहनिय्या के बारे में नाज़िल हुई, जो इस तरह के धोखाधड़ी वाले लेन-देन के लिए मशहूर था (ख़ज़ाइनुल इरफ़ान)।
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