कुरान - 114:6 सूरह अन-नास अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
مِنَ ٱلۡجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ

Transliteration: (Minal jinnati wannaas (End Juz 30) )

6. चाहे वह जिन्नों में से हो या इंसानों में से [8]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नास आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अन-नास – आयत 6 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [8] शैतान और गुमराही से हिफाज़त — जिन्न और इंसानों के रूप में

शैतान इंसानों के दिलों में बुरे ख्याल डालता है, और वह यह काम जिन्नों के ज़रिये भी करता है और इंसानों के ज़रिये भी।
अक्सर कुछ पूरी तरह गुमराह लोग, भलाई का लिबास पहनकर तुम्हारे पास आते हैं। अगर तुम उनकी एक बात भी ध्यान से सुन लो, तो वे तुम्हारे दिल में और गहराई तक असर डालने की कोशिश करते हैं।

लेकिन अगर तुम शुरुआत से ही ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखो, तो वे खुद-ब-खुद दूर हो जाते हैं।
ऐसे लोगों की मौजूदगी को हल्के में मत लो, क्योंकि ईमान के ख़ज़ाने चुराने वाले बहुत से चोर होते हैं।

रसूलअल्लाह ﷺ हर रात सोने से पहले दोनों सुरहें — सुरह फ़लक और सुरह नास पढ़ा करते थे।
फिर अपने मुबारक हाथों पर फूँकते, और पूरे जिस्म पर मलते।

हर मुसलमान को चाहिए कि वह इस पाक सुन्नत को अपनाए, ताकि वह अपने ईमान, जिस्म और रूहानी हिफाज़त हासिल कर सके।

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