Transliteration: (Tanaz zalul malaa-ikatu war roohu feeha bi izni-rab bihim min kulli amr)
(Peace and Protection During the Night of Qadr)
यह आयत शब-ए-क़द्र (शक्ति की रात) की विशेष शांति और सुरक्षा को दर्शाती है, जो इस पवित्र रात में धरती को घेर लेती है। इसका मतलब है कि इस रात में शैतानों, आपदाओं और ईश्वरीय दंडों से सुरक्षा मिलती है।
(Protection from Shaitans and Calamities)
शब-ए-क़द्र को शैतानों, आपदाओं और ईश्वरीय दंडों से सुरक्षा प्राप्त है। अन्य रातों की तुलना में जब जिन्न और शैतान धरती पर भ्रमण करते हैं, यह रात उनके नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षित रहती है।
शैतान अन्य रातों के पहले भाग में अधिक सक्रिय होते हैं, जो विकर्षण और हानि का कारण बनते हैं। लेकिन इस पवित्र रात में, फरिश्तों और पवित्र आत्माओं की मौजूदगी यह सुनिश्चित करती है कि शांति बनी रहे।
(Blessings of the Pious Sages)
पवित्र संतों का धरती पर अस्तित्व इस रात की शांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनकी मौजूदगी शैतानों को दूर करती है और धरती पर ईश्वरीय दंडों के उतरने से बचाती है।
उनका आशीर्वाद एक शांत और सुरक्षित माहौल बनाता है, जिससे फरिश्ते और पवित्र आत्माएँ धरती पर उतर कर अपने कर्तव्यों को पूरा करती हैं।
(Mercy and Blessings Until Dawn)
रात के आखिरी हिस्से में दया और ईश्वरीय आशीर्वाद प्रचुर मात्रा में होते हैं। यह रात का वह हिस्सा है जब फरिश्ते सबसे अधिक सक्रिय होते हैं, शांति फैलाने और माफी के लिए प्रार्थनाएँ करने में।
पूरी रात ईश्वरीय शांति से भरी रहती है, जो सुबह तक कायम रहती है।
(Key Takeaways)
यह आयत शब-ए-क़द्र की पवित्रता को उजागर करती है, जिससे यह एक ऐसा समय बन जाता है जब ईमानदार लोग ईश्वरीय दया, सुरक्षा और शांति की तलाश करते हैं, शैतानों और संसारिक आपदाओं से मुक्त होकर।
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