Transliteration: (Iza jaaa'a nasrul-laahi walfath )
इस सूरह को सूरह अल-फ़तह (Victory) और सूरह विदा (Farewell) भी कहा जाता है, क्योंकि यह पवित्र नबी صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ के इस दुनिया (worldly) से रुख़्सत होने का इशारा करती है (तफ़सीर अज़ीजी)। यह सूरह मक्का की विजय (Conquest) से पहले उतरी थी। कुछ विद्वानों का मानना है कि यह सूरह हज-ए-वदा (Farewell Pilgrimage) के समय उतरी थी, लेकिन पहला विचार ज़्यादा सही है (तफ़सीर रूहुल मआनी)। इस सूरह के आने के दो साल बाद पवित्र नबी صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया (तफ़सीर ख़ाज़िन और मदारिक)।
"मदद" का मतलब है अल्लाह की मदद, चाहे वह फरिश्तों (angels) के ज़रिये हो या मुस्लिम योद्धाओं (fighters) की मदद से।
"विजय" का मतलब मक्का की विजय (Conquest of Makkah) है, जो बाकी जीत (victories) और अरब के लोगों द्वारा इस्लाम अपनाने का कारण बनी। मक्का की विजय भविष्य की घटना थी, लेकिन इसे ऐसे बताया गया जैसे यह पक्की (certain) बात हो। "आएगी" शब्द को भूतकाल में इसलिए कहा गया ताकि इसके पक्के होने पर ज़ोर दिया जा सके।
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