कुरान - 110:2 सूरह अन-नसर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

2
وَرَأَيۡتَ ٱلنَّاسَ يَدۡخُلُونَ فِي دِينِ ٱللَّهِ أَفۡوَاجٗا

Transliteration: (Wa ra-aitan naasa yadkhuloona fee deenil laahi afwajaa)

2.और तुम देखोगे कि लोग अल्लाह के धर्म (Religion) में समूहों (troops) की शक्ल में दाखिल हो रहे हैं[2]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-नसर आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह से प्राप्त मुख्य बिंदु

इस सूरह से तीन मुख्य बिंदु निकलते हैं:

नoble companions (नेक साथी) की संख्या
यह माना जाता है कि नेक साथियों (Companions) की संख्या केवल पांच या सात नहीं थी, बल्कि यह हजारों में थी, जैसा कि अल्लाह तआला ने उन्हें "फौज" (army) के रूप में वर्णित किया है।

विजय (Conquest) के बाद इस्लाम को अपनाने वालों का इमान (faith)
जो लोग मक्का की विजय (Conquest of Makkah) के समय और उसके बाद इस्लाम (Islam) को अपनाए थे, उनका इमान (faith) स्वीकार किया गया था। इसमें अबू सुफ़्यान, अमीर मुआविया, हज़रत वहशी और अन्य लोग शामिल हैं, जो सभी ने सच्चे इमान (true faith) के साथ इस्लाम (Islam) को अपनाया, जैसा कि अल्लाह तआला ने उनके इस्लाम (acceptance of Islam) को स्वीकार करने की गवाही दी है।

सच्चे इमान (faith) में स्थिरता (steadfastness)
यह लोग मक्का की विजय (Conquest of Makkah) के बाद भी अपने इमान (faith) पर मजबूत रहे। उनका इस्लाम (Islam) में निरंतर विश्वास (commitment) इस आयत (verse) से प्रमाणित होता है, और किसी भी स्रोत (source) से यह प्रमाण नहीं मिलता कि उन्होंने इमान (faith) को छोड़ दिया था। यदि उन्हें काफ़िर (apostates) बनने का मुक़द्र (destiny) होता, तो अल्लाह तआला उनके इमान (faith) की इतनी सराहना (praise) नहीं करता। यह उन लोगों के लिए एक सिख (lesson) है जो यह कहते हैं कि केवल पांच साथियों (Companions) का इमान (faith) सच्चा था, जबकि बाकी लोग इस्लाम (Islam) को सुविधा (convenience) के कारण अपनाए और बाद में नबी صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ के निधन (death) के बाद काफ़िर (apostates) बन गए।

नेक साथियों (Companions) की संख्या

यह जानना जरूरी है कि नेक साथियों (Companions) की संख्या 124,000 थी। बद्र के साथी (Companions of Badr) 313 थे, और खुलफा-ए-राशिदीन (Rashidun Caliphs) चार थे, जैसे नबी (Prophets), रसूल (Messengers) और पैग़म्बर (Apostles) की संख्या। मक्का की विजय (Conquest of Makkah) के बाद, मक्का के लोग सभी दिशाओं से इस्लाम (Islam) को अपनाने के लिए बड़े पैमाने पर आए। इससे पहले, एक या दो व्यक्ति ही इस्लाम (Islam) को अपनाते थे।

मक्का की विजय (Conquest of Makkah) के बाद, विभिन्न क़बीलों (tribes) के लोग जैसे बानी असद, बानी फज़रा, बानी मुर्रा, बानी क़नाना, बानी बिलाल, बानी तमीम, अबुल क़ैस क़बीला, बानी तैय, यमन, सीरिया, ताइफ और मक्का के लोग बड़े पैमाने पर आए और इस्लाम (Islam) को अपनाया।

अतिरिक्त जानकारियाँ (Additional Insights)

इसके अलावा, निम्नलिखित बिंदु भी निकाले जा सकते हैं:

  • इस सूरह में ग़ैब (unseen) की जानकारी (information) दी गई है, जो बाद में सत्य (truth) सिद्ध हुई।
  • पवित्र नबी صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ को अपने जीवन (life) की पूरी जानकारी (knowledge) थी, जिसमें यह भी कि वह मक्का की विजय (Conquest of Makkah) और अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं (significant events) को देखेंगे। इसी कारण से नबी صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ने मक्का की विजय (Conquest of Makkah) के बाद पहले साल हज (pilgrimage) नहीं किया, क्योंकि उन्हें अपनी उम्र (lifespan) के बारे में यकीन (certainty) था।
  • पवित्र नबी صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ के समय का सबसे शुभ (virtuous) पहलू यह था कि लोग सीधे नबी (Prophet) के पास जाकर इस्लाम (Islam) को अपनाने के लिए पेश होते थे।

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