Transliteration: (Fasabbih bihamdi rabbika wastaghfirh, innahoo kaana tawwaaba)
इसका अर्थ है, ऐ मेरे प्यारे! जब आप इन घटनाओं को होते देखें, तो अल्लाह तआला की तस्बीह (महिमा), ताहलील (अल्लाह की एकता का वचन) का पाठ करें और अपने अनुयायियों के लिए माफी (forgiveness) की दुआ (prayer) करें, क्योंकि आपकी जिंदगी जल्द ही समाप्त होने वाली है। ये नबी صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ की दुनिया से निधन (demise) के संकेत हैं, क्योंकि उनके आने का उद्देश्य पूरा हो चुका है। इस दुनिया में जो एक क़ैदख़ाना (prison) जैसा है, आप क्यों रहेंगे? आपको अपने रब के पास होना चाहिए, जो आपसे बहुत प्यार करता है।
जैसे-जैसे कोई व्यक्ति उम्र (age) में बढ़ता है, उसे इस दुनिया से अपना लगाव (attachment) कम करना चाहिए और अल्लाह तआला की इबादत (worship) बढ़ानी चाहिए, और धार्मिक क्रियाओं में डूबना चाहिए। उसे अगले जीवन (afterlife) की यात्रा की तैयारी करनी चाहिए, इससे पहले कि यह यात्रा शुरू हो।
पवित्र नबी صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ का इस्तिग़फार (माफी माँगना) या तो उम्मत (Muslim community) के लिए एक शिक्षा (lesson) है या उनके अनुयायियों में से पापियों के लिए माफी (forgiveness) है। पवित्र नबी صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ पूरी तरह से पाप से मुक्त हैं (sinless)।
इस सूरह की revelation के बाद, पवित्र नबी صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ निम्नलिखित का पाठ करते थे: "सुब्हानअल्लाह व बिहमदीही, अस्तग़फिरुल्लाह व अत्तूबू इलाही।"
कुछ हदीसों में यह उल्लेख किया गया है कि यह सूरह वफादारी हज (Farewell Pilgrimage) के दौरान प्रकट हुई थी। इसके बाद यह आयत "आज मैंने आपके लिए आपका धर्म (religion) पूरा किया..." (सूरह अल-माइदा 5:3) प्रकट हुई। पवित्र नबी صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ इसके बाद 80 दिन और दुनिया में रहे।
इसके बाद यह आयत "ऐ प्यारे नबी! वे आपसे एक आदेश (decree) मांगते हैं..." (सूरह अन-निसा 4:177) प्रकट हुई, इसके बाद पवित्र नबी صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ 50 दिन और रहे। फिर यह आयत "और उस दिन से डर (fear) करें जिस दिन आपको अल्लाह की ओर लौटना होगा..." (सूरह अल-बकरा 2:281) प्रकट हुई, और इसके बाद पवित्र नबी صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ और सात दिन जीवित रहे।
संक्षेप में, पवित्र नबी صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ के इस दुनिया में रहने के समय की हदीसें भिन्न (varied) हैं (तफसीर ख़ज़ाइनुल इर्फ़ान)।
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