कुरान - 4:111 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

111
وَمَن يَكۡسِبۡ إِثۡمٗا فَإِنَّمَا يَكۡسِبُهُۥ عَلَىٰ نَفۡسِهِۦۚ وَكَانَ ٱللَّهُ عَلِيمًا حَكِيمٗا

Transliteration: (Wa mai yaksib isman fa innamaa yaksibuhoo 'alaa nafsih; wa kaanal laahu 'Aleeman hakeemaa)

जो कोई कोई गुनाह कमाता है, तो वह अपने ही नफ़्स के खिलाफ उसे कमाता है [345]। और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, हिकमत वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 111 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अन-निसा – आयत 111 की तफ़्सीर

 

✅ [345] गुनाह की जिम्मेदारी व्यक्ति की खुद की होती है

यहां "अपने ही नफ़्स के खिलाफ" कहने का मतलब है कि हर इंसान को अपने गुनाह की सज़ा खुद भुगतनी होगी। ऐसा नहीं हो सकता कि कोई गुनाह करे और उसकी सज़ा कोई और पाए। हाँ, अगर कोई किसी दूसरे को गुनाह में मदद देता है या उसका साथ देता है, तो वह भी गुनहगार माना जाएगा और सज़ा में शामिल होगा। अल्लाह, जो सब जानने वाला और हिकमत वाला है, इंसाफ़ में कोई कमी नहीं करता और कोई ज़ुल्म नज़रअंदाज़ नहीं होता।

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