Transliteration: (Wa mai yaksib khateee'atan aw isman summa yarmi bihee bareee'an faqadih tamala buhtaananw wa ismam mubeenaa)
इस आयत में "गुनाह" से मुराद बड़े गुनाह हैं, और "गलती" से मुराद छोटे गुनाह। किसी बेक़सूर पर झूठा इल्ज़ाम लगाना—चाहे वह मुसलमान हो या ग़ैर-मुसलमान—ज़ुल्म और खुला नाफ़रमानी का काम है। यह हुक्म उस वाक़े के सिलसिले में नाज़िल हुआ जिसमें तम्आ नामी शख़्स ने अपने गुनाह को छुपाने के लिए एक बेगुनाह यहूदी पर इल्ज़ाम लगाया था। क़ुरआन इस किस्म के अमल की सख़्त मज़म्मत करता है, क्योंकि झूठा इल्ज़ाम लगाना बोहतान भी है और बड़ा गुनाह भी। इस आयत से यह उसूल साबित होता है कि हक़ और इंसाफ़ किसी की मज़हबी पहचान से ऊपर है, और किसी पर झूठा इल्ज़ाम लगाना अल्लाह के नज़दीक बहुत संगीन गुनाह है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat