Transliteration: (Wa lakum nisfu maa taraka azwaajukum il lam yakul lahunna walad; fa in kaana lahunna waladun falakumur rub'u mimmaa tarakna mim ba'di wasiyyatiny yooseena bihaaa aw dayn; wa lahunnar rubu'u mimmaa taraktum il lam yakul lakum walad; fa in kaana lakum waladun falahunnas sumunu mimmaa taraktum; mim ba'di wasiyyatin toosoona bihaaa aw dayn; wa in kaana rajuluny yoorasu kalaalatan awim ra atunw wa lahooo akhun aw ukhtun falikulli waahidim minhumas sudus; fa in kaanooo aksara min zaalika fahum shurakaaa'u fissulus; mim ba'di wasiyyatiny yoosaa bihaaa aw dainin ghaira mudaaarr; wasiyyatam minal laah; wallaahu 'Aleemun Haleem)
इसमें पत्नी का सारा माल शामिल है, चाहे दहेज हो, निजी सामान, गहने या महर, जो पति के ज़िम्मे था, सब पर वही विरासत का हुक्म लागू होगा।
यहाँ संतान का मतलब है बच्चे, चाहे मौजूदा पति से हों या पिछले रिश्ते से, लड़के या लड़कियाँ, और पोते-पोतियाँ भी शामिल हैं, क्योंकि अरबी में 'वलद' शब्द सभी के लिए आता है।
यहाँ बच्चों से मुराद वे हैं जो परिवार की नस्ल को आगे बढ़ाते हैं, इसलिए नानी के पोते-पोतियाँ इसमें शामिल नहीं, क्योंकि नस्ल का सिलसिला पिता से चलता है।
चाहे पति की एक पत्नी हो या ज़्यादा, अगर उसकी कोई संतान न हो तो पत्नी को चौथाई मिलेगा, और अगर संतान हो तो आठवां हिस्सा मिलेगा।
अगर मरने वाले की कोई भी संतान हो, तो पत्नी का हिस्सा आठवां हो जाता है, और इसमें पोते-पोतियाँ भी गिने जाते हैं।
जो कुछ छोड़ा गया है, उसमें चल संपत्ति और अचल संपत्ति दोनों शामिल हैं।
वसीयत किसी वारिस के हक में नहीं की जा सकती, और कुल माल के तीसरे हिस्से से ज़्यादा की वसीयत जायज़ नहीं, जब तक बाकी वारिस रज़ामंद न हों।
महर को कर्ज माना जाएगा और उसे विरासत बाँटने से पहले अदा करना ज़रूरी है।
अगर किसी के न माता-पिता हों न संतान, और माँ की तरफ से भाई या बहन हों, तो हर एक को छठा हिस्सा मिलेगा।
अगर एक से ज़्यादा हों तो वे एक तिहाई हिस्से में बराबरी से शामिल होंगे, क्योंकि माँ का हिस्सा भी एक तिहाई से आगे नहीं बढ़ता।
जो वसीयत किसी वारिस के लिए हो, या एक तिहाई से ज़्यादा हो, या किसी हराम काम के लिए हो, वह मान्य नहीं मानी जाएगी।
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