कुरान - 4:14 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

14
وَمَن يَعۡصِ ٱللَّهَ وَرَسُولَهُۥ وَيَتَعَدَّ حُدُودَهُۥ يُدۡخِلۡهُ نَارًا خَٰلِدٗا فِيهَا وَلَهُۥ عَذَابٞ مُّهِينٞ

Transliteration: (Wa mai ya'sil laaha wa Rasoolahoo wa yata'adda hudoodahoo yudkhilhu Naaran khaalidan feehaa wa lahoo 'azaabum muheen)

जो कोई अल्लाह और उसके रसूल की नाफ़रमानी करता है और उसकी हदों से आगे बढ़ता है, वह उसे आग में डाल देगा [58], जिसमें वह हमेशा रहेगा, और उसके लिए ज़लील करने वाला अज़ाब होगा। [57] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 14 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अन-निसा – आयत 14 की तफ़्सीर

 

✅ [57] नाफ़रमानी में तमाम अल्लाही क़ानून शामिल हैं

यह चेतावनी ख़ास तौर पर विरासत के क़ानून से जुड़ी हो सकती है या फिर तमाम इलाही हुक्मों पर लागू हो सकती है। इससे ये सबक़ मिलता है: जो कोई बेटे की जगह पोते को वारिस मानता है, वह सीधे तौर पर अल्लाह और उसके महबूब रसूल ﷺ के हुक्म की ख़िलाफ़वर्जी कर रहा है। यह सिर्फ़ ग़लती नहीं बल्कि इलाही हदों की खुली नाफ़रमानी है।

✅ [58] हमेशा या लंबा अज़ाब ईमान पर निर्भर है

ऐसे लोग दो क़िस्म के हो सकते हैं:
अगर कोई अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के क़ानून को ग़लत समझे, तो:

  • वह काफ़िर कहलाएगा
  • और हमेशा के लिए जहन्नम में रहेगा

लेकिन अगर कोई क़ानून को सही माने लेकिन अमल न करे, तो:

  • वह काफ़िर नहीं बल्कि फ़ासिक़ (बड़ा गुनहगार) कहलाएगा
  • वह बहुत देर तक जहन्नम में रहेगा
  • और खुले हुक्मों की नाफ़रमानी पर ज़लील करने वाला अज़ाब पाएगा।

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