Transliteration: (Wa mai ya'sil laaha wa Rasoolahoo wa yata'adda hudoodahoo yudkhilhu Naaran khaalidan feehaa wa lahoo 'azaabum muheen)
यह चेतावनी ख़ास तौर पर विरासत के क़ानून से जुड़ी हो सकती है या फिर तमाम इलाही हुक्मों पर लागू हो सकती है। इससे ये सबक़ मिलता है: जो कोई बेटे की जगह पोते को वारिस मानता है, वह सीधे तौर पर अल्लाह और उसके महबूब रसूल ﷺ के हुक्म की ख़िलाफ़वर्जी कर रहा है। यह सिर्फ़ ग़लती नहीं बल्कि इलाही हदों की खुली नाफ़रमानी है।
ऐसे लोग दो क़िस्म के हो सकते हैं:
अगर कोई अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के क़ानून को ग़लत समझे, तो:
लेकिन अगर कोई क़ानून को सही माने लेकिन अमल न करे, तो:
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