Transliteration: (Wallaatee ya'teenal faahishata min nisaaa'ikum fastash-hidoo 'alaihinna arba'atam minkum fa in shahidoo fa amsikoohunna fil buyooti hatta yatawaffaa hunnal mawtu aw yaj'alal laahu lahunna sabeelaa)
यहाँ "बेहयाई" से मुराद ज़िना (व्यभिचार) है, क्योंकि यह लफ़्ज़ खास माने में इस्तेमाल हुआ है। अगर इसे आम माना जाए, तो हर तरह की अश्लीलता मुराद हो सकती है, लेकिन यहाँ इसका मतलब साफ़ तौर पर ज़िना, यानी शरीअत के मुताबिक सज़ा का मुस्तहिक़ गुनाह है।
इस आयत में ज़िना साबित करने के लिए चार गवाहों की शर्त रखी गई है। ये गवाह:
यह हुक्म आम तौर पर मुसलमानों से मुख़ातिब है, या अदालत से। यहाँ "तुम्हारी औरतों" से मुराद बीवियाँ हैं, ना कि लौंडियाँ। अगर शौहर गवाह पेश करे और ज़िना साबित हो जाए, तो पत्थर से मारने की सज़ा (रज्म) दी जाएगी। और अगर शौहर गवाह ना ला सके, तो शरीअत का लिआन (परस्पर लानत भेजना) लागू होगा।
ऐसी औरत को तलाक़ देना ज़रूरी नहीं, लेकिन उसे गुनाह से रोकना फ़र्ज़ है, जैसा कि "उन्हें क़ैद करो" से समझ आता है।
ऐसी औरत को घर में इस तरह महदूद किया जाएगा कि:
यह एक उम्र भर की सख़्त क़ैद थी, जब तक कि:
यह आयत बाद में रज्म या कोड़े मारने वाले हुक्म से मंसूख़ (नासख़) हो गई। "यहाँ तक कि अल्लाह उनके लिए कोई राह बना दे" — से यही इशारा है।
इससे यह भी साबित होता है कि:
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