कुरान - 4:16 सूरह अन-निसा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

16
وَٱلَّذَانِ يَأۡتِيَٰنِهَا مِنكُمۡ فَـَٔاذُوهُمَاۖ فَإِن تَابَا وَأَصۡلَحَا فَأَعۡرِضُواْ عَنۡهُمَآۗ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ تَوَّابٗا رَّحِيمًا

Transliteration: (Wallazaani ya'tiyaanihaa minkum fa aazoohumaa fa in taabaa wa aslahaa fa a'ridoo 'anhumaaa; innal laaha kaana Tawwaabar Raheema)

और तुम में से जो दो मर्द (या मर्द व औरत) ऐसी बदकारी करें, तो उन दोनों को सज़ा दो; फिर अगर वे तौबा कर लें और अपनी इस्लाह कर लें, तो उनसे दरगुज़र करो; बेशक अल्लाह बड़ा तौबा क़बूल करने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अन-निसा आयत 16 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अन-निसा - आयत 16

✅ बदकारी की इब्तिदाई सज़ा और तौबा

शुरू-ए-इस्लाम में ज़िना और फ़हश कामों पर डांट-फटकार और तअज़ीर का हुक्म था, जिसे बाद में सूरह अन-नूर की आयत ने मंसूख़ फ़रमा दिया। तौबा और इस्लाह करने वालों के लिए मग़फ़िरत का दरवाज़ा खुला है।

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