Transliteration: (Bar rafa'ahul laahu ilayh; wa kaanal laahu 'Azeezan Hakeemaa)
इस आयत में हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) को शारीरिक रूप से ऊपर उठाने की पुष्टि की गई है।
"उठा लिया" शब्द का अर्थ केवल आत्मिक दर्जा नहीं, बल्कि पूरे शरीर और रूह के साथ ऊपर उठाया जाना है।
आयत की शुरुआत में "बल्कि" शब्द यह स्पष्ट करता है कि यह बात पिछली आयत के सूली देने के झूठे दावे के बिल्कुल विपरीत है।
यदि केवल रूहानी ऊँचाई ही मुराद होती, तो शहादत के दर्जे से ही यह मुमकिन था, और फिर इस स्पष्ट विरोधाभास की ज़रूरत ही न होती।
कुरआन की दूसरी जगह (सूरा यूसुफ़ 12:100) में अल्लाह ने फ़रमाया:
"और उसने अपने माता-पिता को तख़्त पर बिठाया",
जहाँ पर शारीरिक रूप से ऊपर उठाना स्पष्ट है — और यह भी इसी बात की ताईद करता है।
इसलिए यह आयत इस बात का निर्णायक प्रमाण है कि हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) को जिन्दा, शरीर और आत्मा सहित, आसमानों की ओर उठाया गया।
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