कुरान - 37:70 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

70
فَهُمۡ عَلَىٰٓ ءَاثَٰرِهِمۡ يُهۡرَعُونَ

Transliteration: (Fahum 'alaa aasaarihim yuhra'oon)

तो वे भी उन्हीं के नक़्शे-क़दम पर दौड़े चले जा रहे थे [70]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 70 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 70

"तो वे भी उन्हीं के नक़्शे-क़दम पर दौड़े चले जा रहे थे [70]!"

[70] गुमराहों की अंधी तक़लीद का अंजाम

काफ़िर हक़ की वाज़ेह दलीलों को ठुकरा कर अपने गुमराह बुज़ुर्गों के पीछे आंखें बंद करके भागे जा रहे थे। इससे मालूम हुआ कि गुमराहों और बदमज़हबों की सोहबत और पैरवी इंसान को हलाकत में डालती है, जबकि सालेहीन और सच्चे मोमिनों की पैरवी सिराते मुस्तक़ीम पर रखती है।

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