कुरान - 37:1 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

1
وَٱلصَّـٰٓفَّـٰتِ صَفّٗا

Transliteration: (Wassaaaffaati saffaa)

क़सम है उनकी जो सफ़-बस्ता (क़तार बाँध कर) खड़े होते हैं [1]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 1

"क़सम है उनकी जो सफ़-बस्ता खड़े होते हैं [1];"

[1] मुक़द्दस फ़रिश्तों की सफ़बंदी

अल्लाह तआला ने उन मुक़र्रब फ़रिश्तों की क़सम खाई है जो बारगाहे किबरिया में इबादत के लिए, या आसमानों में हुक्मे इलाही के इंतिज़ार में निहायत अदब और ताज़ीम के साथ सफ़ें बांध कर खड़े रहते हैं। इसमें मोमिनों के लिए भी बा-जमाअत नमाज़ में सीधी और मुनज़्ज़म सफ़ें बनाने की तालीम है।

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