Transliteration: (Wassaaaffaati saffaa)
"क़सम है उनकी जो सफ़-बस्ता खड़े होते हैं [1];"
अल्लाह तआला ने उन मुक़र्रब फ़रिश्तों की क़सम खाई है जो बारगाहे किबरिया में इबादत के लिए, या आसमानों में हुक्मे इलाही के इंतिज़ार में निहायत अदब और ताज़ीम के साथ सफ़ें बांध कर खड़े रहते हैं। इसमें मोमिनों के लिए भी बा-जमाअत नमाज़ में सीधी और मुनज़्ज़म सफ़ें बनाने की तालीम है।
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