Transliteration: (Fattaaliyaati Zikra)
"फिर उनकी जो ज़िक्र की तिलावत करते हैं [3];"
इससे मुराद वे फ़रिश्ते हैं जो अल्लाह के कलाम की तिलावत करते हैं, और वह अहले ईमान भी हैं जो नमाज़ में, मजालिस में और मैदान-ए-जिहाद में क़ुरआने पाक की तिलावत करते हैं।
सहाबा-ए-किराम मैदान-ए-जंग में भी बा-जमाअत नमाज़ और नमाज़े ख़ौफ़ क़ायम करते थे। इससे मालूम हुआ कि क़ुरआन की तिलावत और नमाज़ किसी भी हाल में तर्क नहीं की जा सकती।
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