कुरान - 37:3 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
فَٱلتَّـٰلِيَٰتِ ذِكۡرًا

Transliteration: (Fattaaliyaati Zikra)

फिर उनकी जो ज़िक्र (क़ुरआने मजीद) की तिलावत करते हैं [3]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 3

"फिर उनकी जो ज़िक्र की तिलावत करते हैं [3];"

[3] क़ुरआने मजीद की तिलावत की अज़मत

इससे मुराद वे फ़रिश्ते हैं जो अल्लाह के कलाम की तिलावत करते हैं, और वह अहले ईमान भी हैं जो नमाज़ में, मजालिस में और मैदान-ए-जिहाद में क़ुरआने पाक की तिलावत करते हैं।

सहाबा-ए-किराम मैदान-ए-जंग में भी बा-जमाअत नमाज़ और नमाज़े ख़ौफ़ क़ायम करते थे। इससे मालूम हुआ कि क़ुरआन की तिलावत और नमाज़ किसी भी हाल में तर्क नहीं की जा सकती।

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