कुरान - 37:5 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

5
رَّبُّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا بَيۡنَهُمَا وَرَبُّ ٱلۡمَشَٰرِقِ

Transliteration: (Rabbus samaawaati wal ardi wa maa bainahumaa wa Rabbul mashaariq)

जो आसमानों [4] और ज़मीन का और जो कुछ उनके दरमियान है सबका रब है, और पूरबों (मशरिक़ों) का भी रब है [5]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 5

"जो आसमानों और ज़मीन का और जो कुछ उनके दरमियान है सबका रब है, और पूरबों का भी रब है [5]।"

[4] वहदानियत और शाने रूबूबियत का ऐलान

अल्लाह तआला ने इन मख़्लूक़ात की क़सम खाकर अपनी वहदानियत और सिफ़ात को साबित फ़रमाया। जिस तरह अल्लाह ने अपनी ज़ात की तौहीद बयान की, उसी तरह हुज़ूर अकरम ﷺ की नबूवत और अज़मत पर भी क़सम खाई, जैसा कि सूरह या-सीन में है: "वल-क़ुरआनिल हकीम, इन्नका लमिनल मुरसलीन"।

[5] "पूरबों" (मशरिक़ों) के जमा लफ़्ज़ की हिकमत

सूरज साल के 365 दिनों में हर रोज़ एक अलग मक़ाम से तुलूअ होता है। मौसम के बदलने के साथ तुलूअ होने की जगह बदलती रहती है। इसलिए अल्लाह तआला ने मुफ़रद (मशरिक़) के बजाय जमा (मशारिक़) का लफ़्ज़ इस्तेमाल फ़रमाया जो उसकी अज़ीम कु़दरत का सुबूत है।

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