Transliteration: (Rabbus samaawaati wal ardi wa maa bainahumaa wa Rabbul mashaariq)
"जो आसमानों और ज़मीन का और जो कुछ उनके दरमियान है सबका रब है, और पूरबों का भी रब है [5]।"
अल्लाह तआला ने इन मख़्लूक़ात की क़सम खाकर अपनी वहदानियत और सिफ़ात को साबित फ़रमाया। जिस तरह अल्लाह ने अपनी ज़ात की तौहीद बयान की, उसी तरह हुज़ूर अकरम ﷺ की नबूवत और अज़मत पर भी क़सम खाई, जैसा कि सूरह या-सीन में है: "वल-क़ुरआनिल हकीम, इन्नका लमिनल मुरसलीन"।
सूरज साल के 365 दिनों में हर रोज़ एक अलग मक़ाम से तुलूअ होता है। मौसम के बदलने के साथ तुलूअ होने की जगह बदलती रहती है। इसलिए अल्लाह तआला ने मुफ़रद (मशरिक़) के बजाय जमा (मशारिक़) का लफ़्ज़ इस्तेमाल फ़रमाया जो उसकी अज़ीम कु़दरत का सुबूत है।
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