कुरान - 37:182 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

182
وَٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Walhamdu lillaahi Rabbil 'aalameen (section 5))

और सब तारीफ़ें अल्लाह ही के लिए हैं जो सारे जहान का रब [178] (पालने वाला) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 182 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 182

"और सब तारीफ़ें अल्लाह ही के लिए हैं जो सारे जहान का रब [178] (पालने वाला) है।"

[178] तमाम हम्दो-सना का मुस्तहिक़ सिर्फ़ अल्लाह

यह आयत मुबारका सूरह का निहायत अज़ीम और बा-बरकत इख़्तिताम फ़रमाती है कि कायनात की तमाम हम्द, तारीफ़ और शुक्राना सिर्फ़ अल्लाह तआला के लिए है, जो तमाम आलमों का तन्हा रब और पालने वाला है।

इन्सान को हर हाल में और ज़िन्दगी के हर मोड़ पर अल्लाह की हम्दो-सना बयान करते रहना चाहिए। चाहे तक़रीर हो, ख़ुतबा हो, या कोई तहरीर व किताब, उसका इख़्तिताम हमेशा अल्लाह की हम्दो-सना पर होना चाहिए।

हदीस शरीफ़ में आता है कि जो शख़्स किसी मजलिस के ख़ात्मे पर इन तीन आयतों (180 से 182) की तिलावत करता है, उसके लिए सवाब का बड़ा पैमाना भर दिया जाता है।

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