कुरान - 37:177 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

177
فَإِذَا نَزَلَ بِسَاحَتِهِمۡ فَسَآءَ صَبَاحُ ٱلۡمُنذَرِينَ

Transliteration: (Fa izaa nazala bisaahatihim fasaaa'a sabaahul munzareen)

फिर जब वह उनके आंगन में उतरेगा, तो क्या ही बुरी सुबह होगी [174] उन डराए हुओं की! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 177 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 177

"फिर जब वह उनके आंगन में उतरेगा, तो क्या ही बुरी सुबह होगी [174] उन डराए हुओं की!"

[174] अज़ाब का अचानक नाज़िल होना

यह आयत तंबीह करती है कि जब अल्लाह का अज़ाब अचानक उनके सहन (आंगन) और घरों में आ गिरेगा, तो उन लोगों के लिए जिनकी उम्र नाफ़रमानी में गुज़री, वह सुबह निहायत हौलनाक और मनहूस सुबह साबित होगी।

मक्का के मुशरिकीन पर क़हत, जंगों में ज़िल्लत-आमेज़ शिकस्त और क़त्ल का जो अज़ाब उतरा, उससे वे बच न सके।

हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ ने फ़तहे ख़ैबर के मौक़े पर यह आयत तिलावत फ़रमाई थी जब यहूदियों के क़िलों पर मुजाहिदीन का अचानक ग़लबा हुआ।

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