Transliteration: (Afabi'azaabinaa yasta'jiloon)
"तो क्या वे हमारे अज़ाब की जल्दी मचा रहे हैं [173]?"
यह आयत उन काफ़िरों के बारे में नाज़िल हुई जो मज़ाक़ और तंज़ के तौर पर अज़ाब की जल्दी मचाते थे और कहते थे:
"कहाँ है वह अज़ाब? हम पर क्यों नहीं टूट पड़ता?"
उनका यह अंदाज़ किसी ख़ौफ़ की बिना पर नहीं बल्कि तकब्बुर और ढिठाई पर मबनी था। अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि वे किस क़दर नादान हैं जो अपनी ही बर्बादी की जल्दी मचा रहे हैं।
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