कुरान - 37:176 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

176
أَفَبِعَذَابِنَا يَسۡتَعۡجِلُونَ

Transliteration: (Afabi'azaabinaa yasta'jiloon)

तो क्या वे हमारे अज़ाब की जल्दी मचा रहे हैं [173]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 176 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 176

"तो क्या वे हमारे अज़ाब की जल्दी मचा रहे हैं [173]?"

[173] मुशरिकीन का मज़ाक़ और नादानी

यह आयत उन काफ़िरों के बारे में नाज़िल हुई जो मज़ाक़ और तंज़ के तौर पर अज़ाब की जल्दी मचाते थे और कहते थे:
"कहाँ है वह अज़ाब? हम पर क्यों नहीं टूट पड़ता?"

उनका यह अंदाज़ किसी ख़ौफ़ की बिना पर नहीं बल्कि तकब्बुर और ढिठाई पर मबनी था। अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि वे किस क़दर नादान हैं जो अपनी ही बर्बादी की जल्दी मचा रहे हैं।

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