Transliteration: (Fatawalla 'anhum hatta heen)
"तो एक वक़्त तक उनसे रुख़ फेर लीजिए [171],"
इस आयत में हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ को हिदायत दी गई कि काफ़िरों की बद-ज़बानी और ईज़ा-रसानी पर आरज़ी तौर पर सब्र फ़रमाएं और उनसे एराज़ बरतें।
यह हुक्म उस वक़्त तक के लिए था जब तक कि जिहाद के अहकाम नाज़िल नहीं हुए थे।
चुनांचे जब जिहाद की आयतें नाज़िल हुईं तो यह हुक्म मंसूख़ हो गया, जो हालात और हिकमत के मुताबिक़ अहकामे इलाही के तदरीजी नुज़ूल को ज़ाहिर करता है।
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