कुरान - 37:174 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

174
فَتَوَلَّ عَنۡهُمۡ حَتَّىٰ حِينٖ

Transliteration: (Fatawalla 'anhum hatta heen)

तो एक वक़्त तक उनसे रुख़ फेर लीजिए [171], (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 174 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 174

"तो एक वक़्त तक उनसे रुख़ फेर लीजिए [171],"

[171] आरज़ी सब्र और हिकमते अमली

इस आयत में हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ को हिदायत दी गई कि काफ़िरों की बद-ज़बानी और ईज़ा-रसानी पर आरज़ी तौर पर सब्र फ़रमाएं और उनसे एराज़ बरतें।

यह हुक्म उस वक़्त तक के लिए था जब तक कि जिहाद के अहकाम नाज़िल नहीं हुए थे।

चुनांचे जब जिहाद की आयतें नाज़िल हुईं तो यह हुक्म मंसूख़ हो गया, जो हालात और हिकमत के मुताबिक़ अहकामे इलाही के तदरीजी नुज़ूल को ज़ाहिर करता है।

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