Transliteration: (Innaa hum lahumul mansooroon)
"कि बेशक वही मदद किए जाएंगे [169],"
इस आयत का मफ़हूम यह है कि हक़ व बातिल के मअरकों में अल्लाह की ख़ास नुसरत और फ़तह मख़सूस तौर पर अंबिया-ए-किराम और उनके मुख़लिस पैरोकारों ही के लिए तय है।
इसी वजह से किसी भी नबी को मैदाने जिहाद में काफ़िरों के हाथों शहीद नहीं किया जा सका, जो अल्लाह की कामिल हिफ़ाज़त और वादे का खुला सुबूत है।
इसके अलावा, दलीलों और हुज्जतों के मैदान में भी हमेशा अहले हक़ और मुत्तक़ी लोग ही ग़ालिब और कामयाब रहते हैं।
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