Transliteration: (Wa laqad sabaqat Kalimatunaa li'ibaadinal mursa leen)
"और बेशक हमारा फ़रमान हमारे भेजे हुए बंदों [168] (रसूलों) के हक़ में पहले ही तय हो चुका है,"
यह आयत मुबारका वाज़ेह करती है कि आसमान व ज़मीन की पैदाइश से भी पहले, अल्लाह तआला का अज़ली फ़रमान और तक्दीर उसके चुने हुए रसूलों के हक़ में साबित व मुक़र्रर हो चुकी थी।
यह नबियों और रसूलों के उस अज़ीम तरीन मुक़द्दस मक़ाम को उजागर करता है कि वे मख़्लूक़ात की तख़्लीक़ से पहले ही अल्लाह की बारगाह में रिसालत व नुबुव्वत के लिए मुंतख़ब और मुअय्यन फ़रमाए जा चुके थे।
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