कुरान - 37:169 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

169
لَكُنَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلۡمُخۡلَصِينَ

Transliteration: (Lakunna 'ibaadal laahil mukhlaseen)

तो हम ज़रूर अल्लाह के चुने हुए [167] (मुख़लिस) बंदे होते। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 169 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 169

"तो हम ज़रूर अल्लाह के चुने हुए [167] (मुख़लिस) बंदे होते।"

[167] मुनकिरीन का बातिल दावा

यह आयत काफ़िरों के उस झूठे दावे को बयान करती है जिसमें वे कहते थे कि अगर हमारे पास कोई आसमानी किताब नाज़िल होती, तो हम यहूद व नसारा की तरह नाफ़रमानी न करते बल्कि अल्लाह के सबसे मुख़लिस और फ़रमांबरदार बंदे बन कर दिखाते।

लेकिन जब हक़ीक़त में हुज़ूर सय्यिदे आलम ﷺ और अफ़ज़ल तरीन किताब क़ुरआन मजीद उनके पास तशरीफ़ लाए, तो उन्होंने हसद, तकब्बुर और हठधर्मी में आकर उसका साफ़ इन्कार कर दिया और उनके दावे खोखले साबित हुए।

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