कुरान - 37:173 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

173
وَإِنَّ جُندَنَا لَهُمُ ٱلۡغَٰلِبُونَ

Transliteration: (Wa inna jundana lahumul ghaaliboon)

और बेशक हमारा ही लश्कर ग़ालिब रहेगा [170]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 173 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 173

"और बेशक हमारा ही लश्कर ग़ालिब रहेगा [170]!"

[170] अल्लाह का ग़ालिब लश्कर

"अल्लाह का लश्कर" उन लोगों को कहा जाता है जो अल्लाह के दीन की सरबुलंदी के लिए पूरी साबित-क़दमी से खड़े होते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • उलमा-ए-हक़,

  • इस्लाम के जाँबाज़ मुजाहिदीन,

  • वे मोमिनीन जो दीन की ख़िदमत को अपनी ज़िन्दगी का मक़सद बनाते हैं।

अगरचे बाज़ औक़ात ज़ाहिरी दुनियावी असबाब मुख़्तलिफ़ नज़र आएं—जैसे मैदाने कर्बला में ज़ाहिरी तौर पर यज़ीदी लश्कर का दबदबा नज़र आया और हज़रत इमाम हुसैन (रदियल्लाहु अन्हु) ने शहादत का जाम पिया—लेकिन हक़ीक़ी और दायमी फ़तह हमेशा हक़ वालों की ही होती है।

इमाम हुसैन (रदियल्लाहु अन्हु) की अज़ीम क़ुरबानी ने दीने इस्लाम के उसूलों और पाकीज़गी को क़यामत तक के लिए ज़िंदा कर दिया, जबकि यज़ीदियत ज़िल्लत, रुसवाई और लानत का शिकार हो गई। पस साबित हुआ कि आख़िरकार अल्लाह का ही लश्कर ग़ालिब है।

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