कुरान - 37:180 सूरह अस-साफ़्फ़ात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

180
سُبۡحَٰنَ رَبِّكَ رَبِّ ٱلۡعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ

Transliteration: (Subhaana Rabbika Rabbil 'izzati 'amma yasifoon)

पाक है [176] आपका रब, इज़्ज़त वाला, उन बातों से जो वे बनाते हैं! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अस-साफ़्फ़ात आयत 180 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अस-साफ़्फ़ात तफ़सीर - आयत 180

"पाक है [176] आपका रब, इज़्ज़त वाला, उन बातों से जो वे बनाते हैं!"

[176] रब्बे ज़ुल-जलाल की तंज़ीह व तक़दीस

यह आयत मुबारका अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की कामिल पाकी और तंज़ीह का अज़ीम एलान है, जो उसे काफ़िरों और मुशरिकीन की तराशी हुई तमाम बे-बुनियाद बातों (जैसे औलाद, शरीक या अयूब) से बिल्कुल बरी और मुक़द्दस क़रार देती है।

लफ़्ज़ 'सुब्हान' का मफ़हूम है हर ऐब और नुक़्स से पाक होना। जब बंदा सच्चे दिल से यह तस्बीह पढ़ता है, तो उसके दिल से रूहानी ऐब और ज़ुल्मतें दूर हो जाती हैं।

जो लोग तस्बीह पर "सुब्हानल्लाह", "या शाफ़ी", या "या ग़फ़ूर" का विर्द करते हैं, उन्हें रूहानी शिफ़ा, बख़्शिश और क़ल्बी सुकून नसीब होता है। अल्लाह के अस्मा-ए-हुस्ना की तिलावत रूह पर मुबारक़ असर छोड़ती है।

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