Transliteration: (Inna fee zaalika la Aayaah; wa maa kaana aksaruhum mu'mineen)
"बेशक इसमें बड़ी निशानी है, मगर उनमें से अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे [123];"
हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की सरकश क़ौम का तूफ़ान में ग़र्क़ होना और ईमान वालों का कश्ती में सलामत बच जाना अल्लाह की क़ुदरत और नबियों की सच्चाई की एक अज़ीमुश्शान निशानी है। लेकिन इसके बावजूद अक्सर लोग नसीहत हासिल नहीं करते और अपने कुफ़्र व ग़फ़लत पर क़ायम रहते हैं।
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