कुरान - 26:121 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

121
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةٗۖ وَمَا كَانَ أَكۡثَرُهُم مُّؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Inna fee zaalika la Aayaah; wa maa kaana aksaruhum mu'mineen)

बेशक इसमें बड़ी निशानी है, मगर उनमें से अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे [123]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 121 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 121

"बेशक इसमें बड़ी निशानी है, मगर उनमें से अक्सर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे [123];"

[123] सरकश क़ौम की हलाकत में इबरत और नसीहत

हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की सरकश क़ौम का तूफ़ान में ग़र्क़ होना और ईमान वालों का कश्ती में सलामत बच जाना अल्लाह की क़ुदरत और नबियों की सच्चाई की एक अज़ीमुश्शान निशानी है। लेकिन इसके बावजूद अक्सर लोग नसीहत हासिल नहीं करते और अपने कुफ़्र व ग़फ़लत पर क़ायम रहते हैं।

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