कुरान - 26:227 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

227
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ وَذَكَرُواْ ٱللَّهَ كَثِيرٗا وَٱنتَصَرُواْ مِنۢ بَعۡدِ مَا ظُلِمُواْۗ وَسَيَعۡلَمُ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوٓاْ أَيَّ مُنقَلَبٖ يَنقَلِبُونَ

Transliteration: (Illal lazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati wa zakarul laaha kaseeranw wantasaroo min ba'di maa zulimoo; wa saya'lamul lazeena zalamooo aiya munqalabiny yanqaliboon (section 11))

सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए और उन्होंने नेक अमल किए [223], और कसरत से अल्लाह का ज़िक्र किया [224], और अपने ऊपर ज़ुल्म होने के बाद (हक़ के साथ) बदला लिया [225]; और ज़ुल्म करने वाले बहुत जल्द जान लेंगे कि वे किस करवट (अंजाम की तरफ़) उलटते हैं! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 227 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 227

"सिवाय उनके जो ईमान लाए, नेक अमल किए [223], अल्लाह का कसरत से ज़िक्र किया [224], और ज़ुल्म के बाद बदला लिया [225]; और ज़ालिम जल्द जान लेंगे कि वे किस करवट उलटते हैं!"

[223] मोमिन शोअरा (हज़रत हस्सान बिन साबित वगैरह) का इस्तिसना

जब यह आयतें नाज़िल हुईं तो हुज़ूर ﷺ के शायर-ए-दरबार हज़रत हस्सान बिन साबित, हज़रत अब्दुल्लाह बिन रवाहा और हज़रत काब बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हुम रोते हुए हाज़िर हुए कि हम भी शायरी करते हैं। तब यह आयत नाज़िल हुई जिसमें ईमान वाले, नेक अमल करने वाले और दीनी शायरी करने वाले शोअरा को मुस्तस्ना फ़रमाया गया।

[224] हम्द व नाअत और ज़िक्र-ए-इलाही

मोमिन शायर वह हैं जो अपनी ज़बान व क़लम से अल्लाह की हम्द व सना, हुज़ूर ﷺ की नाअत व मन्क़बत और दीन की सच्चाई बयान करते हैं और कसरत से अल्लाह का ज़िक्र करते हैं। हुज़ूर ﷺ ने हज़रत हस्सान के लिए मस्जिद-ए-नबवी में मिम्बर रखवाया और फ़रमाया: 'ऐ हस्सान! काफ़िरों का जवाब दो, रूहुल क़ुदुस (जिब्रील) तुम्हारी मदद कर रहे हैं।'

[225] हक़ का दिफ़ा और ज़ालिमों का इबरतनाक अंजाम

जो इस्लाम और हुज़ूर ﷺ की शान पर हमला करने वाले दुश्मनों का शेरों और दलीलों से दिफ़ा करते हैं, उनका यह अमल जिहाद का दर्जा रखता है। आयत के आख़िर में ज़ालिमों और मुशरिकों को सख़्त चेतावनी दी गई कि क़ियामत के दिन और दुनिया में भी वे बहुत जल्द देख लेंगे कि उनकी सरकशी उन्हें जहन्नम के किस गहरे गढ़े में उलटती है!

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