कुरान - 26:224 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

224
وَٱلشُّعَرَآءُ يَتَّبِعُهُمُ ٱلۡغَاوُۥنَ

Transliteration: (Washshu 'araaa'u yattabi 'uhumul ghaawoon)

और शायरों की पैरवी तो सिर्फ़ बहके हुए (गुमराह) लोग ही करते हैं [220]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 224 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 224

"और शायरों की पैरवी तो सिर्फ़ गुमराह लोग करते हैं [220];"

[220] नबी और शायर के दरमियान अज़ीम फ़र्क़

काफ़िर हुज़ूर ﷺ को (मआज़ल्लाह) शायर कहते थे। अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि ज़माना-ए-जाहिलियत के मुशरिक शायरों के पीछे आवारा, गुमराह और बेहूदा लोग चलते थे जो फ़िज़ूल बातों के शौक़ीन थे। जबकि हुज़ूर ﷺ के ग़ुलाम और पैरोकार हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़, हज़रत उमर फ़ारूक़, हज़रत उस्मान ग़नी और हज़रत अली मुर्तज़ा (रज़ियल्लाहु अन्हुम) जैसी अज़ीम, पाकीज़ा, मुत्तक़ी और बा-किरदार हस्तियां हैं। यह खुली दलील है कि आप शायर नहीं बल्कि अल्लाह के सच्चे रसूल हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now