Transliteration: (Washshu 'araaa'u yattabi 'uhumul ghaawoon)
"और शायरों की पैरवी तो सिर्फ़ गुमराह लोग करते हैं [220];"
काफ़िर हुज़ूर ﷺ को (मआज़ल्लाह) शायर कहते थे। अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि ज़माना-ए-जाहिलियत के मुशरिक शायरों के पीछे आवारा, गुमराह और बेहूदा लोग चलते थे जो फ़िज़ूल बातों के शौक़ीन थे। जबकि हुज़ूर ﷺ के ग़ुलाम और पैरोकार हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़, हज़रत उमर फ़ारूक़, हज़रत उस्मान ग़नी और हज़रत अली मुर्तज़ा (रज़ियल्लाहु अन्हुम) जैसी अज़ीम, पाकीज़ा, मुत्तक़ी और बा-किरदार हस्तियां हैं। यह खुली दलील है कि आप शायर नहीं बल्कि अल्लाह के सच्चे रसूल हैं।
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