कुरान - 26:226 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

226
وَأَنَّهُمۡ يَقُولُونَ مَا لَا يَفۡعَلُونَ

Transliteration: (Wa annahum yaqooloona ma laa yaf'aloon)

और यह कि वे ऐसी बातें कहते हैं जो ख़ुद करते नहीं [226]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 226 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 226

"और यह कि वे ऐसी बातें कहते हैं जो ख़ुद करते नहीं [226];"

[226] क़ौल व अमल का तज़ाद

आम शायरों की आदत होती है कि शेरों में शराफ़त, सख़ावत और बहादुरी के बड़े-बड़े दावे करते हैं मगर अमली ज़िन्दगी में बुज़दिल, कंजूस और बदकार होते हैं। इसके बरअक्स नबी-ए-करीम ﷺ का मुबारक अमल आपके हर फ़रमान से बढ़कर था।

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