कुरान - 26:225 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

225
أَلَمۡ تَرَ أَنَّهُمۡ فِي كُلِّ وَادٖ يَهِيمُونَ

Transliteration: (Alam tara annahum fee kulli waadiny yaheemoon)

क्या तुमने नहीं देखा कि वे (अपनी ख़याली दुनिया में) हर वादी में भटकते फिरते हैं [221]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 225 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 225

"क्या तुमने नहीं देखा कि वे हर वादी में भटकते फिरते हैं [221]?"

[221] बे-मक़सद शायरी और ख़याली वादियों में भटकाव

दुनयावी शोअरा का हाल यह होता है कि उनका कोई मब्दा व मआद नहीं होता; कभी इश्क़ व मज़ाज़ की वादी में, कभी झूठी तारीफ़ व मद्दाही में, कभी किसी की हिजो व बदगोई में और कभी फ़ख़्र व गुरूर में अपनी ख़याली वादियों में भटकते रहते हैं।

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