Transliteration: (Iz qaala lahum akhoohum Lootun alaa tattaqoon)
"जब उनके भाई लूत ने उनसे कहा, 'क्या तुम डरते नहीं [161]?'"
हज़रत लूत अलैहिस्सलाम मुद्दतों से उन लोगों के दरमियान मुक़ीम थे और उनके सुख-दुख के शरीक थे, इसलिए बिरादराना शफ़क़त के साथ उनसे मुख़ातब हुए।
आपने फ़रमाया कि तुम उस मालिक-ए-हक़ीक़ी से क्यों नहीं डरते जिसने तुम्हें ज़िन्दगी बख़्शी? अपनी बदकारी और बेहयाई छोड़कर पाकीज़गी और तक़वा इख़्तियार करो।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat